あらすじ
रामेश बेदी के अनुसार इंसान के सम्पर्क में सबसे अधिक मदारी बंदर आता है। मदारी की डुगडुगी पर नटखट बंदर को तमाशबीनों का मनोरंजन करते देखा जाता है। उधर आज़ाद विचरने वाले बंदर धरों, स्कूलों, दफ्श्तरों में ऊधम मचाने के लिए मशहूर हैं। बंदर की विभिन्न प्रजातियों को दिलचस्प और गहन जानकारी देने वाली इस पुस्तक में श्री बेदी ने प्रतिपादित किया है कि लंगूर का मुँह काला होता है और इसकी गाल में ताज़ा आहार जमा करने की थैली नहीं होती जैसी कि बंदर की गाल में होती है। श्रीराम का अनन्य भक्त होने से हनुमान के प्रति लोकमानस में अगाध श्रद्धा है। छोटे गाँव से लेकर महानगर तक सभी जगह स्थापित इसकी लाखों प्रतिमाओं को करोड़ों श्रद्धालु पूजते हैं। हनुमान चालीसा के पाठ से स्तवन करते हैं। यह भी कहा जाता है कि प्राणिमात्र के दुख-दर्दों को दूर कर उन्हें सुख की राह बताने के लिए भगवान बुद्ध अपने तीस पूर्वजन्मों में बंदर के रूप में पैदा हुए थे। पूँछ वाले और बिना पूँछ वाले बंदरों की जातियों का इस पुस्तक में सचित्र परिचय दिया है। 130 सादे चित्रों के अलावा और 15 रंगीन फोटो भी इसमें शामिल गए हैं। बिना पूँछ वाले बंदर - हुल्लक, ओरङ्-उतान, चिम्पांजी, गोरिल्ला - का दिलचस्प जीवन परिचय पुस्तक में दिया है।

