“प्रसन्नता” और “वियोग" में दिल से निकलने वाली गहरी भावनाएं तो समस्त मानव जाति के पास होती हैं, जिनकी बेहतर कलात्मक अभिव्यक्ति या प्रशंसा के द्वारा ही वो खुद को अन्य प्राणियों से अलग कर पाती है। वर्तमान पुस्तक "तड़प" में संकलित रचनाएं, समय समय पर प्रकृति और पुरुष के मन में एक दूजे के लिए उठने वाली खुशी और विरह से उत्पन्न भावनाओं की सरल शब्दों में, गजल प्रारूप में, अभिव्यक्ति है।