फिर मिलेंगे कहीं
AnkitPateriyaAshokMishra
発売日: Independently Published
あらすじ
कभी-कभी ज़िंदगी में कुछ रिश्ते अधूरे रहकर ही सबसे सच्चे बन जाते हैं। "फिर मिलेंगे कहीं" अश्मित और पूर्णिमा की वही अधूरी कहानी है, जो पहली मोहब्बत की मासूमियत और जुदाई के दर्द से भरी है। अश्मित का आख़िरी पत्र, उसकी आत्मा की आख़िरी पुकार है - एक ऐसा इज़हार जो कभी अपने मुकाम तक नहीं पहुँचा। सालों बाद जब माही का जवाब आता है, तो सच उजागर होता है - कि कुछ ख़त सिर्फ़ दिलों में रखे जाते हैं, कभी भेजे नहीं जाते। यह किताब प्रेम, याद और आत्मा की यात्रा है - जहाँ हर पन्ना कहता है "अगर मोहब्बत सच्ची हो, तो बिछड़ने के बाद भी ज़िंदा रहती है...
ISBN: 9798269800943