あらすじ
जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती 'वृन्दावन की जोगन' की कहानियाँ पाठकों को आम जन मानस की संवेदना से जोड़ती हैं। सुख-दुःख के सागर में डूबते-इतराते पात्र अपने ही प्रतीत होते हैं। इन कहानियों की पृष्टभूमि में पहुँच कर पाठक इनसे जुड़ पाएँगे और कहीं न कहीं अपने आसपास ही इन पात्रों को महसूस करेंगे। ‘वृन्दावन की जोगन’ की कहानियाँ पढ़ते समय पाठक को गुदगुदी भी होगी, दुःख भी होगा और आनन्द की वर्षा भी होगी| इन कहानियों में कदम-कदम पर जीवंतता है, जिजीविषा और जज्बा भी है। ‘वृन्दावन की जोगन’ की लेखिका नूतन पाण्डेय एक ऐसी कथाकार हैं जो अपनी यायावरी प्रवृति के कारण प्रकृति को बहुत नजदीक से देखती रही हैं। उनकी कहानियां जनसामान्य की कहानियां हैं। वे समय के साथ चलती दिखाई देते हुए भी अनेक बार समय से बहुत आगे निकल चुकी दिखाई देती हैं। पुस्तक आपके समक्ष है।
ISBN: 9789391414825ASIN: 9391414826