अनुभूति ( लघुकथा ) / Anubhuti
श्रीमतीअमितामराठे/ShrimatiAmitaMarathe
あらすじ
पुस्तक में लघुकथाएँ और लघु कहानियाँ हैँ। लघुकथा विधा के बारे में प्रतिष्ठित साहित्यकार डाॅ.योगेन्र्दनाथ शुक्ल जी कहते हैं,"लघुकथा, कहानी का वह रूप है जिसका फलक तो छोटा होता है, लेकिन उस छोटे से फलक के भीतर एक बड़ा फलक छुपाए रखती है। यही कारण है कि वह पाठक को गंभीर चिंतन करने के लिए मजबूर कर देती है। उसका समसामयिक होना, मानव मन की शिनाख्त कर, उसकी संवेदनाओं को झंझोरने की शक्ति रखना और कहानी की तरह तृप्ति देना, उसे परिपूर्णता प्रदान करता है।" मैंने लघुकथा लिखने का प्रयास किया है। जहाँ लघुकथा से आगे थोड़े विस्तार की आवश्यकता लगी वहाँ मैंने लघु कहानी का दामन थामा है।रचनाओं में जीवन के छोटे -छोटे प्रसंगों को चुना है। बदलते समय की नब्ज पर हाथ रखने की कोशिश की है। इन रचनाओं में पारिवारिक, सामाजिक जीवन में फैली विसंगतियों, रिश्तों की टूटन, प्रेम, दया, करूणा और नैतिक मूल्यों को अपनी अल्प बुद्धि से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। मैं, 'अनुभूति 'को आकार देने के लिए तथा सक्रिय लेखन को प्रोत्साहित करने का श्रेय, अपनी छोटी बहू नेहा (वरिष्ठ पत्रकार और पत्रिका सामाचार पत्र में 'फनकार' पेज की हेड) को दूँगी। लेखन को पुस्तक का रूप देकर सुरक्षित करने की प्रेरणा और परिकल्पना नेहा की ही है। मेरी लेखन यात्रा में जलधारा साहित्यिक मंच, कथा दर्पण साहित्यिक मंच, विचार प्रवाह साहित्य मंच, अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक मित्र मंडल जबलपुर आदि अनेक साहित्यिक मंच के मित्रों प्रति भी आभार व्यक्त करती हूँ। इन सभी मंचों से मैंने बहुत कुछ सीखा है। सभी के प्रति हृदयतल से कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ। इस पुस्तक के प्रकाशन में जिनका भी कदम -कदम पर सहयोग मिलता रहा है उन सभी के प्रति कृतज्ञ हूँ। साहित्य संसार को "अनुभूति" लघुकथा तथा लघु कहानी संग्रह भेंट करते हुए, हर्षित हूँ। अब यह आपकी हो गई। एक निवेदन है जब यह पुस्तक आपके हाथ में होगी तो आप सभी का स्नेह तो मिलेगा ही लेकिन त्रुटियों को बताने वाला मार्गदर्शन भी मिले तो धन्य हो जाऊँगी।