मेरी पुस्तक हनी ट्रैप (एक अपहरण लखनऊ से जयपुर) की कथा मेरे कई अनुभवों का हिस्सा है, लिहाजा किसी एक विशेष घटना से इसे जोड़कर न पढ़ा जाए। इसमें जो चरित्र मैंने लिए हैं, वे मेरी कल्पना का नतीजा है लेकिन जो तौर-तरीके मैंने इस्तेमाल किये हैं, वे मेरी पत्रकारिता के अनुभव का नतीजा हैं। इस पूरी कहानी में मेरी जानकारी की कई घटनाओं का अनुभव मौजूद है और मैंने इसी अनुभव से कहानी को एक वास्तविक व सजीव रूप देने की कोशिश की है। इसका फैसला आप करेंगे, मैं कहाँ तक कामयाब हो पाया हूँ।