あらすじ
मुस्कुराती सुनहरी बारिश अंतर्मन की छटपटाहट का सुखद परिणाम है । जो भी कभी देखा ,सुना या सहा वही सच कहीं न कहीं इस 'बारिश ' की आत्मा है , रचनाओं की असल ज़मीन है और सबसे विशेष है । दरअसल ये वो अनहद नाद है, वो आवाज़ है जिसको सुनना और समझना मेरे लिए भी कभी आसान नहीं रहा । 'ज़ौक़' साहब ने क्या ख़ूब लिखा " हम जानते थे कि इल्म से कुछ जानेंगे , जाना तो ये जाना कि न जाना कुछ भी " इस पुस्तक की उपलब्धि वो स्वरचित नज़्में हैं जिनकी मधुर, मृदुल काव्य-गंगा , निष्ठा और प्रेम की पराकाष्ठा को रेखांकित करती हैं । वो कविताएँ हैं जो अतीत के अनुभव से वर्तमान को परखने का प्रयास करती हैं । ख़ुद को तलाशते हुए, तराशते हुए जो भी मिलता गया वही लफ़्ज़ों में ढलता गया । " ख़ुद से मुलाक़ात का ख़ुमार अभी बाकी है यहाँ, एक अरसे बाद, इन नज़ारों में चमक आयी है " माँ सरस्वती के चरण वंदन से पोषित मेरी यह अभिव्यक्ति , मेरी कल्पना और यथार्थ का संगम, यह 'बारिश ' पन्नों पर उतर कर किसी दिल को भिगो दे तो मेरा प्रयास सफल है। संपर्क: ई मेल : gupta.rajendra146@gmail.com राजेन्द्र गुप्ता ' राजन ' फोन : +91-86969-34092 जयपुर






















































